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हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 22
विजानतां मोक्ष एष श्रमः स्यादविजानताम्। मोक्षयानमिदं कृत्सन॑ विदुषां हारितोऽब्रवीत् ॥
यह संन्यासाश्रम ज्ञानियों के लिये तो मोक्षरूप है, परंतु अज्ञानियों के लिये श्रमरूप ही है। हारीतमुनि ने विद्वानों के लिये इस सम्पूर्ण धर्म को मोक्ष का विमान बताया है।
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