महात्मा सर्वतो दान्तः सर्वत्रैवानपाश्रितः ।
अपूर्वचारकः सौम्यो अनिकेतः समाहितः ॥
महात्मा को सब प्रकार से संयमी होना चाहिए, किसी भी स्थान या वस्तु पर आश्रित नहीं होना चाहिए। वह निराले आचरण वाला, सौम्य, गृह-रहित तथा एकाग्रचित्त हो।
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