मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 2
भीष्म उवाच- मोक्षधर्मेषु निरतो लघ्वाहारो जितेन्द्रियः । प्राप्नोति परमं स्थानं यत् परं प्रकृतेर्भुवम् ॥
भीष्म ने कहा— जो मनुष्य मोक्षधर्म में निरंतर तत्पर रहता है, अल्पाहारी है और जिसने अपनी इन्द्रियों को वश में कर लिया है, वह प्रकृति से परे स्थित उस परम स्थान को प्राप्त कर लेता है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
हारीतगीता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

हारीतगीता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें