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हारीतगीता • अध्याय 1 • श्लोक 2
भीष्म उवाच- मोक्षधर्मेषु निरतो लघ्वाहारो जितेन्द्रियः । प्राप्नोति परमं स्थानं यत् परं प्रकृतेर्भुवम् ॥
भीष्मजी ने कहा - राजन्! जो पुरुष मोक्षधर्मों में तत्पर, मिताहारी और जितेन्द्रिय होता है, वह उस प्रकृति से परे परब्रह्म परमात्मा का जो अविनाशी परमधाम है, उसे प्राप्त कर लेता है।
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