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हंसगीता • अध्याय 1 • श्लोक 8
उद्धव उवाच । विदन्ति मर्त्याः प्रायेण विषयान्पदमापदाम् । तथापि भुञ्जते कृष्ण तत्कथं श्वखराजवत् ॥
उद्धवजी ने पूछा - भगवन्‌! प्राय: सभी मनुष्य इस बात को जानते हैं कि विषय विपत्तियों के घर हैं; फिर भी वे कुत्ते, गधे और बकरे के समान दुःख सहन करके भी उन्हीं को ही भोगते रहते हैं। इसका क्‍या कारण है?
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