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हंसगीता • अध्याय 1 • श्लोक 42
तैरहं पूजितः सम्यक्संस्तुतः परमर्षिभिः । प्रत्येयाय स्वकं धाम पश्यतः परमेष्ठिनः ॥ ॥ इति भागवतपुराणे एकादशस्कन्धान्तर्त्गता हंसगीता समाप्ता ॥
जब उन परमर्षियों ने भली-भाँति मेरी पूजा और स्तुति कर ली, तब मैं ब्रह्माजी के सामने ही अदृश्य होकर अपने धाम में लौट आया।
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