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हंसगीता • अध्याय 1 • श्लोक 20
दृष्ट्वा मां त उपव्रज्य कृत्वा पादाभिवन्दनम् । ब्रह्माणमग्रतः कृत्वा पप्रच्छुः को भवानिति ॥
मुझे देखकर सनकादि ब्रह्माजी को आगे करके मेरे पास आये और उन्होंने मेरे चरणों की वन्दना करके मुझसे पूछा कि 'आप कौन हैं ?'।
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