स मामचिन्तयद्देवः प्रश्नपारतितीर्षया ।
तस्याहं हंसरूपेण सकाशमगमं तदा ॥
उद्धव! उस समय ब्रह्माजी ने इस प्रश्न का उत्तर देने के लिये भक्तिभाव से मेरा चिन्तन किया। तब मैं हंस का रूप धारण करके उनके सामने प्रकट हुआ।
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