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हंसगीता • अध्याय 1 • श्लोक 16
श्रीभगवानुवाच । पुत्रा हिरण्यगर्भस्य मानसाः सनकादयः । पप्रच्छुः पितरं सूक्ष्मां योगस्यैकान्तिकीं गतिम् ॥
भगवान्‌ श्रीकृष्ण ने कहा - प्रिय उद्धव! सनकादि परमर्षि ब्रह्माजी के मानस पुत्र हैं। उन्होंने एक बार अपने पिता से योग की सूक्ष्म अन्तिम सीमा के सम्बन्ध में इस प्रकार प्रश्न किया था।
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