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हंस • अध्याय 1 • श्लोक 11
ॐ पूर्णमद इति शान्तिः ॥
ॐ! वह (ब्रह्म) अनंत है, और यह (ब्रह्मांड) अनंत है। अनंत अनंत से उत्पन्न होता है। (फिर) अनंत (ब्रह्मांड) की अनंतता को लेते हुए, वह अकेले ही अनंत (ब्रह्म) के रूप में रहता है। ॐ! मुझमें शांति हो! मेरे वातावरण में शांति रहे! मुझ पर कार्रवाई करने वाली ताकतों में शांति हो!
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