मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 7 • श्लोक 7
शाम्भवी मुद्रिकां कृत्वा आत्मप्रत्यक्षमानयेत्‌ । बिन्दुब्रह्ममयं दृष्ट्वा मनस्तत्र नियोजयेत्‌ ॥
(ध्यान योग समाधि बताते हैं-) शांभवी मुद्रा को करके आत्मा का प्रत्यक्ष करना चाहिये। बिन्दुब्रह्म को एकबार देखकर वहाँ मन को नियोजित करे।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें