पञ्चधा भक्तियोगेन मनोमूर्च्छा च षड्विधा ।
षड्विधोऽयं राजयोगः प्रत्येकमवधारयेत् ॥
भक्तियोग पाँच प्रकार का है। तथा मनोमूर्च्छा छह प्रकार की है, जो राजयोग कही जाती है। इसमें भी प्रत्येक का धारण करना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।