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घेरण्ड संहिता • अध्याय 7 • श्लोक 4
अहं ब्रह्म न चान्योऽस्मि ब्रह्मैवाहं न शोकभाक्‌ । सच्चिदानन्दरूपोऽहं नित्यमुक्तः स्वभावान्‌ ॥
मैं ही ब्रह्म हूँ, अन्य कुछ नहीं हूँ। में ब्रह्म हूँ, न कि शोकादि का भागी हूँ। में नित्यमुक्त स्वभाववाला सच्चिदानन्द स्वरूपात्मा हूँ।
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