भूचरा: खेचराश्चामी यावन्तो जीवजन्तव: ।
वृक्षणुल्मलतावल्लीतृणाद्या वारि पर्वता: ।
सर्व ब्रह्म विजानीयात् सर्व पश्यति चात्मनि ॥
भूचर, खेचर और जितने भी जीव जन्तु हैं, वृक्ष, गुल्म, बेल, लता, तृणादि जल और पर्वत सबको ब्रह्म जाने और आत्मा में ही देखे।
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