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घेरण्ड संहिता • अध्याय 7 • श्लोक 16
मनोमूर्च्छा समासाद्य मन आत्मनि योजयेत्‌ । परमात्मनः समायोगात्‌ समाधिं समवाप्नुयात्‌ ॥
मनोमूर्च्छा को करके मन को आत्मा में लगाये, तब परमात्मा के योग से समाधि को प्राप्त करना चाहिये।
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