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घेरण्ड संहिता • अध्याय 7 • श्लोक 14
स्वकीयहृदये ध्यायेदिष्टदेवस्वरूपकम्‌ । चिन्तयेद्‌ भक्तियोगेन परमाह्वादपूर्वकम्‌ ॥
(भक्तियोग समाधिविधि बताते हैं-) अपने हृदय में इष्टदेव के स्वरूप का ध्यान करे। भक्तिपूर्वक परंआह्वाद का चिन्तन करे।
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