योनिमुद्रां समासाद्य स्वयं शक्तिमयो भवेत् ।
सुशृङ्गाररसेनैव विहरेत् परमात्मनि ॥
(लयसिद्धि समाधिविधि कहते हैं-) योनिमुद्रा को करके स्वयं को शक्तिमान बनाये। श्रंगाररूप रस से परमात्मा में विहार करे।
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