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घेरण्ड संहिता • अध्याय 6 • श्लोक 5
तन्मध्ये संस्मरेद्योगी कल्पवृक्षं मनोहरम्‌ । चतुः शाखाचतुर्वेदं नित्यपुष्पफलान्वितम्‌ ।।
उसके मध्य में योगी कल्पवृक्ष का स्मरण करे, उसमें चारों वेद नित्य फल, फूलों से समन्वित हैं।
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