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घेरण्ड संहिता • अध्याय 6 • श्लोक 18
घेरण्ड उवाच- तेजोध्यानं श्रुतं चण्ड सूक्ष्मध्यानं शृणुष्व मे । बहु भाग्यवशाद्‌ यस्य कुण्डली जाग्रती भवेत्‌ ॥
हे चण्डकापालि! तेजोध्यान कहने के बाद अब सूक्ष्मध्यान को में कहता हूँ। वह भाग्यवान्‌ है, जिसकी कुण्डलिनी जाग्रत हो जाती है।
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