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घेरण्ड संहिता • अध्याय 6 • श्लोक 11
तन्मध्ये कर्णिकायां तु अकथादि रेखात्रयम्‌ । हलक्षकोणसंयुक्तं प्रणवं तत्र वर्तते ॥
उसके मध्य में कर्णिका में अ,क,थ, ये तीन रेखायें ह,ल,क्ष इन तीन से युक्त ॐ०कार विराजित है।
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