ध्यान के स्थूल, ज्योति और सूक्ष्म ये तीन प्रकार कहे हैं। स्थूल मूर्तिमय कहा गया है, ज्योति तेजस्वरूप तथा सूक्ष्म बिन्दुमय ब्रह्म है, जो कुंडली से परे देवता है।
(समीक्षा - बिन्दुमय ध्यान कुंडलिनी शक्ति से जाग्रत होने वाला ध्यान है। अत: कुंडली परादेवता कहा है।)
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