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घेरण्ड संहिता • अध्याय 6 • श्लोक 1
घेरण्ड उवाच- स्थूलं ज्योतिस्तथा सूक्ष्मं ध्यानस्य त्रिविधं विदुः । स्थूलं मूर्तिमयं प्रोक्तं ज्योतिस्तेजोमयं तथा । सूक्ष्म बिन्दुमयं ब्रह्म कुण्डलीपरदेवता ॥
ध्यान के स्थूल, ज्योति और सूक्ष्म ये तीन प्रकार कहे हैं। स्थूल मूर्तिमय कहा गया है, ज्योति तेजस्वरूप तथा सूक्ष्म बिन्दुमय ब्रह्म है, जो कुंडली से परे देवता है। (समीक्षा - बिन्दुमय ध्यान कुंडलिनी शक्ति से जाग्रत होने वाला ध्यान है। अत: कुंडली परादेवता कहा है।)
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