पञ्चवारं दिने वृद्धिर्वारेकं च दिने तथा ।
अजपापरिमाणं च यावत् सिद्धिः प्रजायते ॥
दिन में एक बार और पाँच बार वृद्धि करते हुए यह अजपा संख्या जब तक सिद्धि हो (तब तक करे)।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।