मूलाधारे यथा हंसस्तथा हि हदि पङ्कजे ।
तथा नासापुटदन्दे त्रिभिर्हससमागमः ॥
मूलाधार में, हृदय कमल में और नासिका छिद्रों की दोनों नाड़ियों में 'हं' बीज के जप का आवागमन होता है।
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