(मूर्छा कुम्भक विधि बताते हैं-) सुख से कुम्भक करके और मन को भ्रुवों के बीच में सब विषयों से हटाकर मन की मूर्छा को ही मूर्च्छा कहा है। इस मन के आत्मा में योग से निश्चय आनन्द होता है।
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