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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 81
जपादष्टगुणं ध्यानं ध्यानादष्टगुणं तप: । तपसोऽष्टगुणं गानं गानात्परतरं नहि ॥
जप से आठ गुना ध्यान, ध्यान से आठगुना तप, तप से आठगुना गान और गान से गुना (अधिक) अन्य कोई नही है।
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