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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 77
श्वृणुयाद्दक्षणे कर्णे नादमन्तर्गतं शुभम्‌ । प्रथमं झिञ्झीनादं च वंशीनादं ततः परम्‌ ॥
तब दायें कान से आंतरिक नाद को सुने। प्रथम तो झींगुरों का सा नाद और उसके परे वंशीनाद (सुनायी देगा)।
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