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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 76
अर्धरात्रे गते योगी जन्तूनां शब्दवर्जिते । कर्णोपिधाय हस्ताभ्यां कुर्यात्‌ पूरककुम्भकम्‌ ॥
(भ्रामरी कुंभक विधि बताते हैं-) आधी रात्रि होने पर योगी प्राणियों के शब्दों के पूर्ण शान्त होने पर हाथों से कान बन्दकर पूरक और कुंभक करे।
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