एवं विंशतिवारं च कृत्वा कुर्याच्च कुम्भकम् ।
तदन्ते चालयेद्वायुं पूर्वोक्तं च यथाविधि ॥
इस प्रकार बीस बार करके कुंभक करना चाहिये। तब अंत में पूर्वोक्त विधि से वायु को चलाये (निकालना) चाहिये।
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