सम्यग्गोमयलिप्तं च कुटीरं तत्रनिर्मितम् ।
एवं स्थानेषु गुप्तेषु प्राणायामं सम भ्यसेत् ॥
तथा वहाँ कुटीर अच्छी प्रकार गोमय (गोबर) से लिप्त हो, इस प्रकार के गुप्त स्थानों में प्राणायाम अभ्यास करना चाहिये।
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