मुख्य पृष्ठ शास्त्र परिचय ऐप इंस्टॉल करें
घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 66
कुम्भकः सूर्य भेदस्तु जरामृत्युविनाशकः । बोधयेत्‌ कुण्डलीं शक्तिं देहानलं विवर्धयेत्‌ । इति ते कथितं चण्ड सूर्य भेदनमुत्तमम्‌ ॥
सूर्यभेदक कुंभक जरामृत्यु का विनाशक है, यह कुंडलिनी शक्ति और जठराग्नि को बढ़ाने वाला है। इस प्रकार यह उत्तम सूर्यभेदक प्राणायाम कहा गया है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।

सभी अध्याय उपलब्ध

घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।

सरल अर्थ

प्रत्येक श्लोक के साथ स्पष्ट हिंदी अनुवाद।

ऑफलाइन पढ़ें

इंटरनेट के बिना भी ग्रंथ पढ़ें।
Krishjan
धर्म का अन्वेषण
ऐप इंस्टॉल करें