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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 60
हदि प्राणो वहेन्नित्यमपानो गुदमण्डले । समानो नाभिदेशे तु उदानः कण्ठमध्यगः ॥
हृदय में नित्य प्राण गमन करता है, गुदा में अपान, नाभि में समान, कंठमध्य में उदानवायु (गमन करता है)।
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