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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 56
प्राणायामात्‌ खेचरत्वं प्राणायामाद्‌ रोगनाशनम्‌ । प्राणायामाद्बोधयेच्छक्तिं प्राणायामान्मनोन्मनी । आनन्दो जायते चित्ते प्राणायामी सुखी भवेत्‌ ॥
प्राणायाम से खेचरत्व प्राप्त होता है, प्राणायाम से रोगनाश होता है, प्राणायाम से बोधशक्ति प्राप्त होती है, प्राणायाम से ज्ञान प्राप्ति और चित्त में आनंद होता है। प्राणायाम करने वाला मनुष्य अवश्य सुखी होता है।
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