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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 53
प्राणायामो निगर्भस्तु विना बीजेन जायते । एकादिशतपर्यन्तं पूरककुम्भकरेचनम्‌ ॥
निगर्भ प्राणायाम बिना बीज के ही हो जाता है। इस प्रकार पूरक, कुंभक और रेचक कुल एक से लेकर सौ तक मात्रायें होती हैं।
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