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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 49
सत्त्वमयं हरिंध्यात्वा उकारं कृष्णवर्णकम्‌ । चतुःषष्ट्या च मात्रया कुम्भकेनैव धारयेत्‌ ॥
पुन: उकार स्वरूप कृष्णवर्ण सत्वगुणरूप विष्णु का ध्यान करके चौंसठ बार जप से कुंभक से धारण करे।
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