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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 47
प्राणायामं सगर्भं च प्रथमं कथयामि ते । सुखासने चोपविश्य प्राइमुखो वाप्युदङ्मुखः । ध्यायेद्विधें रजोगुणं रक्तवर्णमवर्णकम्‌ ॥
सगर्भ प्राणायाम मैं प्रथम कहता हूँ। सुखासन में बैठकर प्राइमुख या उत्तर मुख होकर रजोगुण रूप रक्तवर्ण और अ वर्ण स्वर का ध्यान करे।
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