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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 44
एवं विधां नाड़ीशुद्धि कृत्वा नाड़ी विशो धयेत्‌ । दृढ़ो भूत्वासनं कृत्वा प्राणायामं समाचरेत्‌ ॥
इस प्रकार नाड़ी शुद्धि करके नाड़ी का शोधन करना चाहिये। तथा दृढ़ता से आसन लगाकर प्राणायाम करना चाहिये।
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