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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 42
नासाग्रे शशिधूरिबम्बं ध्यात्वा ज्योत्स्नासमन्वितम्‌ । ठं बीजंषोडशेनैव इडया पूरयेन्मरुत्‌॥
फिर नासिका के अग्रभाग में चन्द्रिका से युक्तचन्द्र का ध्यान करके 'ठं’ बीज को सोलह बार जपते हुए इड़ा से वायु पूरक करे।
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