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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 4
अविश्वासं दूरदेशे अरण्ये रक्षिवर्जितम्‌ । लोकारण्ये प्रकाशश्च तस्मात्‌ त्रीणि विवर्जयेत्‌ ॥
दूरदेश में विश्वास नहीं होता, अरण्य में रक्षा का अभाव होता है, नगर में करने से सार्वजनिक होता है, अत: इन तीनों स्थानों का निषेध करना चाहिये।
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