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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 37
उपविश्यासने योगी पद्मासनं समाचरेत्‌ । गुर्वादिन्यासनं कुर्याद्‌ यथैव गुरुभाषितम्‌ । नाड़ीशुद्धि प्रकुर्वीत प्राणायामविशुद्धये ॥
योगी आसन पर बैठकर पद्मासन लगाये। गुरु आदि न्यास करके जैसा गुरु ने सिखाया है, उस प्रकार प्राणायाम सिद्धि हेतु, नाड़ी शुद्धि करे।
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