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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 36
धौतकर्म पुरा प्रोक्तं षट्कर्मसाधने यथा । शृणुष्व समनुं चण्ड ! नाडीशुद्धिर्यथा भवेत्‌ ॥
षट्कर्म साधन में धौतिकर्म पहले कह दिया है। अब समनु नाड़ी शुद्धि जैसे होती है, वह सुनो।
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