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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 35
नाड़ीशुद्धिद्विधा प्रोक्ता समनुनिर्मनुस्तथा । बीजेन समनुं कुर्यान्निर्मनुं धौतकर्मणा ॥
नाड़ी सिद्धि भी दो प्रकार की समनु और निर्मनु कही गयी हैं समनु को बीज मंत्र से और निर्मनु को धौतिकर्म से करना चाहिये।
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