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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 33
नाडीशुद्धि कथं कुर्यान्नाड़ीशुद्धिस्तु कीदृशी । तत्सर्वं श्रोतुमिच्छामि तद्वदस्व दयानिधे ॥
(तब चण्डकापालि ने पूछा-) हे दयानिधे! नाड़ीशुद्धि कैसे करनी चाहिये, नाड़ी शुद्धि कैसी होती है? उस सबको मैं सुनना चाहता हूँ, अतः इसे बताइये।
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