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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 31
एवं विधिविधानेन प्राणायामं समाचरेत्‌ । आरम्भे प्रथमं कुर्यात्‌ क्षीराज्यं नित्यभोजनम्‌ । मध्याह्ले चैव सायाह्ले भोजनद्वयमाचरेत्‌ ॥
इस प्रकार विधि विधान से प्राणायाम करना चाहिये। पहले आरम्भ में दूध,घी और नित्य भोजन करना चाहिये। मध्याह्न और सायंकाल दो बार योगी को भोजन करना चाहिये।
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