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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 3
दूरदेशे तथारण्ये राजधान्यां जनान्तिके । योगारम्भं न कुर्वीत कृतश्चेत्‌ सिद्धि न भवेत्‌ ॥
दूर देश में, अरण्य में, राजधानी में, जनों के बीच में योग का आरम्भ न करे, इससे सिद्धि नहीं होती।
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