दूरदेशे तथारण्ये राजधान्यां जनान्तिके ।
योगारम्भं न कुर्वीत कृतश्चेत् सिद्धि न भवेत् ॥
दूर देश में, अरण्य में, राजधानी में, जनों के बीच में योग का आरम्भ न करे, इससे सिद्धि नहीं होती।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।