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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 22
अन्नेन पूरयेदर्ध तोयेन तु तृतीयकम्‌ । उदरस्य तुरीयांशं संरक्षेद्वायुचारणे ॥
अन्न मात्र आधा उदर ही खाये, तृतीय भाग अर्थात्‌ उदर के एक चौथाई भाग में जल पीये,तथा चौथाई भाग वायु संचरण के लिये छोड़ देना चाहिये।
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