आदौ स्थानं तथा कालं मिताहारं तथापरम् ।
नाडीशुद्धि ततः पश्चात् प्राणायामं च साधयेत् ॥
पहले स्थान, तब काल, फिर मिताहार, फिर नाड़ीशुद्धि (इन सब क्रियाओं को साध लेने) के बाद प्राणायाम को साधना चाहिये।
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