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घेरण्ड संहिता • अध्याय 5 • श्लोक 15
वसन्ते वापि शरदि योगारम्भं समाचरेत्‌ । तदा योगो भवेत्‌ सिद्धो विनायासेन कथ्यते ॥
वसंत या शरद में योगारम्भ का आचरण करे। इसमें अनायास ही योग सिद्ध होता है, ऐसा कहा जाता है।
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