जहाँ-जहाँ मन जाता है, मन (वहाँ-वहाँ उतना ही) चञ्चल और अस्थिर होता है। अत: मन की चंचलता को (इस प्रत्याहार से) रोककर अपने वश में लाना चाहिये।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।