बहुना किमिहोक्तेन सारं वच्मि च चण्ड ते ।
नास्ति मुद्रासमं किञ्जित् सिद्धिदं क्षितिमण्डले ॥
अधिक क्या कहूँ? चे चंडकापालि! तुझे सार बताता हूँ कि (मुद्रा के योगियों को) सिद्धिदायक पृथ्वीतल पर अन्य कुछ नहीं है।
पूरा ग्रंथ पढ़ें
घेरण्ड संहिता के सभी अध्याय और श्लोकों को उनके अर्थ और व्याख्या सहित पढ़ने के लिए Krishjan ऐप इंस्टॉल करें। ऐप में आपको संरचित अध्याय, आसान नेविगेशन और ऑफलाइन पढ़ने की सुविधा मिलती है।
सभी अध्याय उपलब्ध
घेरण्ड संहिता के 18 अध्याय और सभी श्लोक एक ही स्थान पर।