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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 99
बहुना किमिहोक्तेन सारं वच्मि च चण्ड ते । नास्ति मुद्रासमं किञ्जित्‌ सिद्धिदं क्षितिमण्डले ॥
अधिक क्या कहूँ? चे चंडकापालि! तुझे सार बताता हूँ कि (मुद्रा के योगियों को) सिद्धिदायक पृथ्वीतल पर अन्य कुछ नहीं है।
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