न तस्य जायते मृत्युर्नास्य जरादिकं तथा ।
नाग्निजलभयं तस्य वायोरपि कुतो भयम् ॥
उसकी न मृत्यु और जरादिक होता है। न अग्निजल का भय होता हे, वायु का भय भी उसे कहीं नहीं होता।
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