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घेरण्ड संहिता • अध्याय 3 • श्लोक 96
मुद्राणां पटलं ह्येतत्‌ सर्वव्याधिविनाशकम्‌ । नित्यमभ्यासशीलस्य जठराग्निविवर्धनम्‌ ॥
मुद्राओं का यह विवरण सर्वव्याधि विनाशक है और अभ्यासशील की जठराग्नि को बढ़ाने वाला है।
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